Thursday, November 30, 2023

हिमाचल प्रदेश: इस मंदिर में है महाभारत काल का 5000 साल पुराना गेहूं का दाना…

हिमाचल प्रदेश विश्वभर में देवभूमि के नाम से जाना जाता है। यहां के हर मंदिर के साथ एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है। इसी बीच एक कहानी ऐसी भी है जो आज से नहीं बल्कि महाभारत काल से जुड़ी है। हिमाचल के मंडी जिले के करसोग में एक ऐसा मंदिर है, जहां होने वाले चमत्कार हर किसी को अपनी ओर खींच लेते हैं। करसोग का ममलेश्वर मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है।

गौरतलब है कि महाभारत काल में पांडव अपने वनवास के दौरान वहां जाकर ठहरे थे। ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने वहां गेहूं की खेती की थी और आज भी इस मंदिर में गेहूं का एक दाना रखा हुआ है। इस गेहूं के दाने का वजन 250 ग्राम है। इस मंदिर में एक विशाल ढोल भी है। ऐसा माना जाता है कि महाबली भीम अपने खाली समय में इस विशाल ढोल को बजाया करते थे।

शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने की थी

इसके अलावा मंदिर में स्थापित पांच शिवलिंगों के बारे में मान्यता है कि पांडवों ने उन्हें वहां स्थापित किया था। मंदिर को महाभारत काल का भी बताया जाता है। ममलेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। मंडी जिला के करसोग स्थित ममलेश्वर मंदिर में जाने के लिए श्रद्धालु मंडी और शिमला दोनों मार्गों से हिमाचल पहुंचकर करसोग पहुंच सकते हैं। ममलेश्वर महादेव का मंदिर करसोग बस स्टैंड से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर है।

जब भगवान राम रावण को हराकर लंका से अयोध्या लौटे तो कुछ समय बाद उनका ज्ञान इस क्षेत्र में पहुंचा। सूचना के देर से आने के कारण वहां लगभग एक महीने बाद इसे मनाया गया। आज हजारों साल बीत जाने के बाद भी ममलेश्वर महादेव में पुरानी दीपावली का विशेष महत्व है। पुरानी दिवाली के दिन देवी-देवताओं की आरती होती है। इस विशेष अनुष्ठान से लोगों की समस्याओं का समाधान होता है।

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